Vol:1| Issue:3 | July-September,2026

Author Name
Pankaj Kumar Singh
Abstract

सारांश (Abstract)

रवींद्रनाथ टैगोर का शैक्षणिक दर्शन आधुनिक शिक्षा व्यवस्था के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश प्रदानकरता है। आज की 21वीं सदीमें, जहाँ शिक्षाप्रणाली तेजी से व्यावसायिक, डिजिटल और तनावग्रस्त होती जा रही है, टैगोर काप्राकृतिक, स्वतंत्रता-आधारित और सर्वांगीण विकास का सिद्धांत अत्यंत प्रासंगिक हो जाता है। प्रस्तुत शोध पत्र में टैगोर के शैक्षणिक विचारों—जैसे प्रकृतिके सामीप्य में शिक्षा, बाल-केंद्रितदृष्टिकोण, कला एवं रचनात्मकता का समावेश तथा विश्व-बंधुत्व कीभावना—का आधुनिकशिक्षा प्रणाली और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के संदर्भ में विश्लेषणात्मक अध्ययन किया गया है। टैगोर की शिक्षा पद्धति केवल बौद्धिक ज्ञान तक सीमित नहीं थी, बल्कि उन्होंनेशारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक विकास के संतुलन पर बल दिया।

Publish Date