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  • ABSTRACT:

    Cybercrime refers to actions that use computer systems and the internet as a tool to obtain private information about a person without the person's knowledge & disclose it on online platforms to damage the person's reputation or cause them mental or physical harm. The rate of cybercrimes has increased as a result of technological advancement. Internet crimes have increased along with our growing reliance on the internet. This is mostly because more than half of online users have inadequate training and education, are unaware of technical changes, and are not completely aware of how online platforms operate. India is one of the few nations that passed the IT Act 2000 to address concerns linked to cybercrimes and prevent their exploitation. However, this act ignores some of the most serious threats to security and challenges that are still rapidly expanding in the current era. Secondary data was acquired for the research paper. The aim is to better understand the idea, its application, and its impact on the economy through various dimensions.

    Keywords: Cybercrime, Strategies and Challenges in India, Cyber Law, IT Act 2000.

    Author: *Dr. Dharmendra kumar **Ritesh Kumar
  • सारांश:

    ज्ञानमीमांसा दर्शनशास्त्र की वह शाखा है जो ज्ञान के सिद्धांत से संबंधित है। यह ज्ञान की प्रकृति, औचित्य और विश्वास की तर्कसंगतता का अध्ययन करती है। सुकरात, प्लेटो से ले आधुनिक जगत के दार्शिनिकके लेखो, विचारो से भी कोईस्पष्ट दावा किया जा सकता है कि ज्ञान क्या है  जब प्रारंभिक सवाल का ही उत्तर हमारे पास नही है तो किस तरह हम उसके मार्ग कि कल्पना कर सकते है तथा ज्ञान कि संरचना के प्रति इतनी असहमति है कि ज्ञान के विभिन्न प्रकार क्या हैं, जिसकी कोई सर्वमान्य “मास्टर सूची” मौजूद ही नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ज्ञान विशुद्ध रूप से दर्शनशास्त्र कि प्रकृति का है; बहस सदियों से चली आ रही है, तर्क, तथ्यों को पीछे छोड़ देते हैं, और हर किसी की इस बारे में अलग-अलग राय होती है कि ज्ञान क्या है या क्या नहीं है। इस आलेख में हम ज्ञान के जी० टी० बी० सिद्धांत के साथ-साथ विशुद्ध दार्शनिक विमर्श पर चर्चा करंगे जो ज्ञान को मुख्य दो आधारोंतर्कवाद/ बुद्धिवाद और अनुभववाद में बाटता है।

    संकेत शब्द- ज्ञानमीमांसा, जी०टी०बी० सिधान्त, तर्कवाद, अनुभववाद 

    Author: *तौसीफ मलिक **पंकज कुमार गुप्ता
  • साहित्य और संस्कृति का परस्पर घनिष्ठ सम्बन्ध होता है। संस्कृति जिन जीवन मूल्यों का संचयन करता है, साहित्य उन जीवन मूल्यों का पोषण करता है। ‘‘साहित्य या संस्कृति के स्थाई और सर्वमानरू मूल्या क्या हैं जिन्हें  हम मनुष्यता की मूल्यांकन धरोहर के रूप में सहेज सकें या जिनके कारण मनुष्य सही अर्थों में मनुष्य या उसके द्वारा रची जाने वाली संस्कृति ही सही मायनों में मानव संस्कृति है। वस्तुतः साहित्य और संस्कृति के स्थाई मूल्य वे हैं जिन्हें मनुष्य अपने लम्बे सामाजिक जीवन में प्रकृति तथा परिस्थितियों से संघर्ष करते हुये अर्जित और समृद्ध किया है।’’1 संस्कृति मनुष्य की सामासिक सह अस्तित्व का बोध कराती है। साहित्य और संस्कृति युगानुरूप हमारे अन्तर में विगत युगो  को आत्मसात किये रहती है जिससे उनकी निरन्तरता सदा बनी रहती है। ‘‘यही सही है कि युग और व्यवस्थाओ  बदलने के साथ हमारा साहित्य और संस्कृति अभिरूचियां हमारी मान्यतायें हमारे चिार विश्वास बदलने हैं और उनके अनुरूप साहित्य का भी नया रूप सामने आता है जो उनकी गतिशीलता उनकी जीवन्तता और उनकी शक्ति का परिचायक है, किन्तु ऐसा नहीं है कि उनके भीतर जो स्थायी तत्व हैं वे समाप्त हो जाते हैं।’’2 चेतना और साहित्य का अन्तर्सम्बन्ध रीतिकाल में क्षीण दिखता है तो इसका कारण तत्कालीन सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियां हैं। 

    Author: डाॕ सुनीता गुप्ता
  • सारांश:

    दुनिया के तमाम विकसित और विकासशीलदेश अपने- अपने स्तर पर देश प्रेम के साथ-साथ विश्व प्रेम के प्रति अपनी सजकता को जोर-शोर से दिखाते है। सरकारें मोहब्बत, हमदर्दी, प्यार, मानवता के साथ  देश की नीव रखती है, और दुसरे ही बरक्स वह इस प्रेम को किसी भौगोलिक परिधि में सीमित कर बाकी के प्रति नफ़रत और प्रतिद्वंदीजैसा बर्ताव कर वह हिडिन करिकुलम की तरह परोस देते है वह  साथ ही साथ देश और विश्व के प्रति अपने लोगो में एक कर्तव्य की भावना को विकसित करने के उद्देश से जी20, ग्लोबल वार्मिंग, आतंकवाद जैसी  अवधारण को वैश्विक पटल पर रखती हैं। वह यह दिखाने का प्रयत्न करती है, कि विश्व के सभी मानव एक समान है, लेकिन दुसरे ही पहर जाति, विचार में भिन्नता, रहने का तरीका, ईश्वर संबंधित मान्यताएं, खाने संबंधित विभिनताएं, नसल, रंग, वर्ग, के चलते  लोगो और लोगो का समूह किसी को खास भौगोलिक स्थान से दूसरे स्थान पर जबरन जाने के लिया मजबूर किए जाता है। तो सवाल लाज़मी हो जाता है, कि 12 दशकों से क्यों वह  सफेद चादर ओढ़े विश्व बंधुता का नारा दे रही जब नफरत ही उसकी पहचान है। इस शोध आलेख में शोधार्थी ने कुछ प्रश्नोंको उजागर करने का प्रयत्न किया है। जैसे विश्व बंधुता क्या है? मानव पलायन क्या है? क्यों विश्व बंधुता के नारे के साथ-साथ मानव पलायन बढ़ रहा है?

    शब्द संकेत:-विश्व बंधुता, समाज, मानव, मानव पलायन

    Author: तौसीफ* मलिक ** डॉ० मसूद अंसारी
  • .सारांश (Abstract):

    यह लेख महिला सशक्तिकरण की प्रक्रिया में शिक्षा को सबसे शक्तिशाली उपकरण के रूप में प्रस्तुत करता है। सामाजिक परिप्रेक्ष्य में, शिक्षा न केवल महिलाओं को साक्षर बनाती है, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, निर्णय लेने की क्षमता और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध खड़े होने का साहस भी विकसित करती है। यह लेख शिक्षा के माध्यम से महिलाओं की आर्थिक स्वावलंबन, स्वास्थ्य सुधार और राजनीतिक भागीदारी पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण करता है। महिला सशक्तिकरण का सबसे शक्तिशाली माध्यम शिक्षा है। महिला शिक्षा से  सामाजिक परिवर्तन की गति में बदलाव आता है और  लैंगिक समानता, आर्थिक स्वतंत्रता, पितृसत्ता तथा मानवाधिकार की रक्षा होती है । शिक्षा महिलाओं को तर्कशील बनाती है। आज आधुनिक युग में महिला और पुरुष एक ही गाड़ी के दो पहिये के समान है । सामाजिक दृष्टि से शिक्षा के कई आयाम है ,उन सभी की विवेचना करना समीचीन प्रतीत होता है ।

    मूल शब्द (Keywords): शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक परिवर्तन, लैंगिक समानता, आर्थिक स्वतंत्रता, पितृसत्ता, मानवाधिकार।

    Author: • साधना सिंह
  • सारांश 
    अल्जाइमर्स डिमेंशिया (Alzheimer's disease)  एक प्रगतिशील न्यूरोडीजेनेरेटिव रोग है, जो मुख्यतः वृद्ध व्यक्तियों को प्रभावित करता है। इस रोग में मस्तिष्क की कोशिकाएँ धीरे-धीरे नष्ट होने लगती हैं, जिससे स्मृति, सोचने-समझने की क्षमता तथा व्यवहार में निरंतर गिरावट आती है। प्रारंभिक अवस्था में व्यक्ति हाल की घटनाओं को भूलने लगता है, सामान्य शब्दों को याद रखने में कठिनाई अनुभव करता है तथा निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो जाती है।
    जैसे-जैसे रोग बढ़ता है, व्यक्ति अपने परिचित लोगों को पहचानने में भी असमर्थ हो सकता है और दैनिक जीवन के सामान्य कार्यों को करने में कठिनाई महसूस करता है। इस रोग का प्रमुख कारण मस्तिष्क में बीटा-अमाइलॉइड प्लाक और टाऊ प्रोटीन का असामान्य संचय माना जाता है, जो न्यूरॉन्स के बीच संचार को बाधित करता है। इसके अतिरिक्त बढ़ती आयु, आनुवंशिक प्रवृत्ति, असंतुलित जीवनशैली तथा पर्यावरणीय कारक भी इसके जोखिम को बढ़ाते हैं।
    वर्तमान समय में इस रोग का पूर्ण उपचार उपलब्ध नहीं है, परंतु कुछ औषधियाँ और उपचार पद्धतियाँ इसके लक्षणों को नियंत्रित करने और प्रगति को धीमा करने में सहायक सिद्ध होती हैं। संतुलित आहार, नियमित शारीरिक व्यायाम, मानसिक सक्रियता तथा सामाजिक सहभागिता इस रोग की रोकथाम और प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
    मुख्य शब्द 
    अल्जाइमर्स, डिमेंशिया, स्मृति ह्रास, न्यूरोडीजेनेरेटिव रोग, मस्तिष्क कोशिकाएँ, बीटा-अमाइलॉइड।

    Author: डॉ0 सूफ़िया
  • सारांश 
    भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था देश की आर्थिक और सामाजिक संरचना का आधार है, जो 58ः जनसंख्या को रोजगार और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 20ः योगदान देती है। यह अनुसंधान पत्र उत्तराखंड के ऋषिकेश, जिला हरिद्वार में कृषि नवाचारों-जैविक खेती, डिजिटल कृषि, ड्रोन तकनीक, और स्मार्ट सिंचाई प्रणालियों के प्रभाव, चुनौतियों, और संभावनाओं का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। प्राथमिक डेटा (100 किसानों के साक्षात्कार और प्रश्नावली) और द्वितीयक डेटा (सरकारी रिपोर्ट, शोध पत्र) के आधार पर, यह अध्ययन नवाचारों की स्वीकार्यता, उनके आर्थिक, सामाजिक, और पर्यावरणीय प्रभाव, और नीतिगत सुधारों की आवश्यकता को उजागर करता है। अध्ययन का उद्देश्य स्थानीय कृषि प्रणालियों में नवाचारों को लागू करने की बाधाओं और अवसरों को समझना और स्थायी विकास के लिए ठोस सुझाव देना है।

    Key Word- . आर्थिक संरचना , सामाजिक संरचना, कृषि नवाचार, नीतिगत सुधार,  स्थानीय कृषि प्रणाली

    Author: Dr. Sallan Ali