सारांश:
ज्ञानमीमांसा दर्शनशास्त्र की वह शाखा है जो ज्ञान के सिद्धांत से संबंधित है। यह ज्ञान की प्रकृति, औचित्य और विश्वास की तर्कसंगतता का अध्ययन करती है। सुकरात, प्लेटो से ले आधुनिक जगत के दार्शिनिकके लेखो, विचारो से भी कोईस्पष्ट दावा किया जा सकता है कि ज्ञान क्या है जब प्रारंभिक सवाल का ही उत्तर हमारे पास नही है तो किस तरह हम उसके मार्ग कि कल्पना कर सकते है तथा ज्ञान कि संरचना के प्रति इतनी असहमति है कि ज्ञान के विभिन्न प्रकार क्या हैं, जिसकी कोई सर्वमान्य “मास्टर सूची” मौजूद ही नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ज्ञान विशुद्ध रूप से दर्शनशास्त्र कि प्रकृति का है; बहस सदियों से चली आ रही है, तर्क, तथ्यों को पीछे छोड़ देते हैं, और हर किसी की इस बारे में अलग-अलग राय होती है कि ज्ञान क्या है या क्या नहीं है। इस आलेख में हम ज्ञान के जी० टी० बी० सिद्धांत के साथ-साथ विशुद्ध दार्शनिक विमर्श पर चर्चा करंगे जो ज्ञान को मुख्य दो आधारोंतर्कवाद/ बुद्धिवाद और अनुभववाद में बाटता है।
संकेत शब्द- ज्ञानमीमांसा, जी०टी०बी० सिधान्त, तर्कवाद, अनुभववाद