Vol:1,Issue: 2,April-June,2026
सार(ABSTRACT)
आधुनिक भारतीय शिक्षादर्शन में स्वामीविवेकानंद और रवींद्रनाथटैगोर का योगदानअत्यंत मौलिक एवंदूरगामी है। औपनिवेशिकब्रिटिश शासन द्वारालागू की गईमैकालेवादी शिक्षा प्रणालीने भारतीय युवाओंको अपनी सांस्कृतिकजड़ों से काटकरकेवल प्रशासनिक आवश्यकताओंकी पूर्ति कासाधन बना दियाथा। इसके विरोधमें स्वामी विवेकानंदऔर रवींद्रनाथ टैगोरने मानव-केंद्रित, सर्वांगीण और स्वावलंबीशिक्षा का सिद्धांतप्रतिपादित किया। जहाँस्वामी विवेकानंद ने 'चरित्र-निर्माण' और 'मनुष्य-मेकिंग' (Man-making Education) को शिक्षा कामूल आधार माना, वहीं रवींद्रनाथ टैगोरने 'प्रकृति', 'स्वतंत्रता' और 'सृजनात्मकता' (Naturalism and Creativity)के समन्वय पर बल दिया ।
प्रस्तुत शोध-पत्रका मुख्य उद्देश्यस्वामी विवेकानंद औररवींद्रनाथ टैगोर कीशैक्षणिक विचारधाराओं कासमीक्षात्मक एवं तुलनात्मकअध्ययन प्रस्तुत करनाहै। इस अध्ययनमें दोनों विचारकोंके दर्शन, शिक्षणपद्धतियों तथा पाठ्यक्रमका विश्लेषण कियागया है। यहशोध गुणात्मक (Qualitative) अनुसंधानदृष्टिकोण और विश्लेषणात्मकपद्धति पर आधारितहै। अध्ययन कानिष्कर्ष यह स्पष्टकरता है किविवेकानंद और टैगोरके विचार चरित्र, पर्यावरण, और वैश्विकचेतना के निर्माणके लिए अत्यंतप्रासंगिक हैं।
मुख्य शब्द (Keywords): स्वामी विवेकानंद, रवींद्रनाथ टैगोर, शैक्षणिक विचारधारा, चरित्र-निर्माण, प्रकृतिवाद, वेदांत दर्शन, शांतिनिकेतन ।